उद्योग जगत में शोक की लहर: प्रसिद्ध उद्योगपति एवं महापौर प्रशांत सिंघल के पूज्य पिताश्री का निधन

अलीगढ़ ब्यूरो :: 

अलीगढ़ शहर के प्रतिष्ठित उद्योगपति रमेश चन्द्र सिंघल जो अपनी मेहनत, ईमानदारी और समाजसेवा के लिए दूर-दूर तक जाने जाते थे। 21 अप्रैल 2026 को उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे अलीगढ़ सहित राजनीतिक एवं सामाजिक गलियारों में गहरा शोक व्याप्त हो गया है। तो वहीं अलीगढ़ के लिए अत्यंत दुःखद और शोकपूर्ण वक्त है। पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था, लेकिन आज प्रातः लगभग 10 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे उद्योग जगत और समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।

 

संघर्ष से सफलता तक का अद्भुत सफर

ररमेश चन्द्र सिंघल ने अपने जीवन की शुरुआत अत्यंत साधारण परिस्थितियों में की, लेकिन अपनी अटूट मेहनत, दूरदृष्टि और लगन के बल पर उन्होंने उद्योग जगत में एक विशिष्ट पहचान बनाई। बचपन से ही व्यापार में परिवार का हाथ बंटाया, लेकिन उनके मन में हमेशा कुछ बड़ा करने की जिद और जुनून रहा।

वर्ष 1979 में उन्होंने पीतल उद्योग की नींव रखी, और इसके बाद 1982 में अपने अथक प्रयासों से अलीगढ़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाते हुए निर्यात के क्षेत्र में शहर का नाम विश्व पटल पर स्थापित किया। उनकी गिनती उन चुनिंदा उद्योगपतियों में होती थी जिन्होंने न केवल व्यापार किया, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार देकर उनके जीवन को भी संवारने का कार्य किया।

सरल स्वभाव और समाजसेवा में अग्रणी

रमेश चंद्र सिंघल का व्यक्तित्व जितना प्रभावशाली था, उतना ही विनम्र और सरल भी था। वे हमेशा समाजसेवा और जनकल्याण के कार्यों में आगे रहते थे। उनका मानना था कि सफलता का असली अर्थ समाज के लिए कुछ कर पाना है। उनका पैतृक गांव कोरह, रुस्तमपुर है, जहां से उन्होंने अपनी जड़ों को कभी नहीं छोड़ा और हमेशा अपने गांव एवं समाज के विकास के लिए तत्पर रहे।

परिवार में शोक की लहर

उनके परिवार में दो सुपुत्र— महापौर प्रशांत सिंघल एवं उद्योगपति निशांत सिंघल तथा दो पुत्रियां हैं। उनकी बड़ी पुत्री प्रिया अग्रवाल मुरादाबाद के महापौर परिवार से जुड़ी हैं, जबकि छोटी पुत्री निशा अग्रवाल का विवाह भरतपुर के प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार में हुआ है।

राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव
रमेश चन्द्र सिंघल का शुरू से ही भारतीय जनता पार्टी से गहरा जुड़ाव रहा। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के समर्थन में आयोजित कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई और उनकी अध्यक्षता भी की थी।

एक युग का अंत
27 जून 1956 को जन्मे रमेश चंद्र सिंघल का जाना एक युग के अंत के समान है। उनका जीवन संघर्ष, सफलता और समाजसेवा की प्रेरणादायक मिसाल रहेगा। आज अलीगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरा प्रदेश उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहा है। हर आंख नम है और हर दिल यही कह रहा है “ऐसे महान व्यक्तित्व बार-बार जन्म नहीं लेते।”

पब्लिक टीवी परिवार ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति दे।

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