आरक्षण से बदलेगी सियासत की तस्वीर, महिलाओं को मिलेगी निर्णय लेने की शक्ति

लखनऊ ब्यूरो ::

मुरादाबाद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम अभियान के तहत समाज  की प्रभावशाली महिलाओं के द्वारा प्रेस वार्ता को संबोधित किया गया। पत्रकार वार्ता में बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की महानगर संयोजिका अल्पना रितेश गुप्ता ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से नीति निर्माण की दिशा अधिक संवेदनशील और समावेशी बनेगी। नारी शक्ति सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है।” नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 देश के लोकतांत्रिक इतिहास का ऐतिहासिक निर्णय है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की महानगर संयोज़िका अल्पना रितेश गुप्ता

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की संयोजिका अल्पना रितेश गुप्ता ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को राजनीति में 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित कर उन्हें निर्णय लेने की मुख्य धारा में लाएगा। इससे महिलाओं की आवाज मजबूत होगी और समाज में समान अधिकारों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे आने वाली पीढ़ी की बेटियों को प्रेरणा मिलेगी और वे नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ेंगी, जिससे देश के विकास को नई दिशा मिलेगी।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर अपनी बात रखतीं हुईं सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट की ट्रस्टी शिखा गुप्ता

 

सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट की ट्रस्टी शिखा गुप्ता ने कहा कि कानून महिलाओं को “भागीदार” से “निर्णयकर्ता” बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रमुख लाभ में लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण होगा। नीति निर्माण अधिक संवेदनशील और जन-केंद्रित होगा। महिलाओं को “लाभार्थी” से “नीति निर्माता” बनाया जाएगा। लेकिन संसद/विधानसभा में यह अनुपात अभी भी कम है। यही अंतर यह कानून खत्म करेगा।

 

शक्ति वंदन अधिनियम पर अपनी बात रखतीं डॉ मीनू मेहरोत्रा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मेरठ प्रांत में महिला समन्वय की प्रांत सह संयोजिका मेजर डॉ मीनू मेहरोत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं एनडीए सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 भारत के लोकतांत्रिक यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। संसद और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला यह संवैधानिक संशोधन केवल एक कानून नहीं बल्कि देश की करोड़ों माता बहनों और बेटियों के सम्मान का राष्ट्रीय संकल्प है।

अपनी बात रखतीं हुईं महिला रोग विशेषज्ञ डा. नीतू रस्तोगी

महिला रोग विशेषज्ञ डा नीतू रस्तोगी ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना, महिला नेतृत्व के बिना अधूरा है। भारत में महिलाएँ वोटिंग और समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन राजनीति में प्रतिनिधित्व अभी भी कम है। भागीदारी बढ़ी है, लेकिन प्रतिनिधित्व अभी भी संतुलित नहीं है। इस अंतर को खत्म करने के लिए यह कानून आवश्यक है। महिलाओं के नेतृत्व का प्रभाव (वैश्विक व भारतीय संदर्भ) जब महिलाएँ नेतृत्व करती हैं अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है नीतियाँ अधिक समावेशी और संवेदनशील बनती हैं शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण पर अधिक ध्यान जाता है शोध बताते हैं कि जेंडर गैप कम होने पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में 7 ट्रिलियन डॉलर तक की वृद्धि संभव है।

आर्ट आफ लिविंग से जुडी योग प्रशिक्षिका रितु नारंग बोलतीं हुईं

आर्ट आफ लिविंग से जुडी योग प्रशिक्षिका रितु नारंग ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में महिला सशक्तिकरण के ठोस परिणाम सामने आए है। 32 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खाते खुले। मुद्रा योजना लगभग 68 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ । 10 करोड़ महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं। पीएमएवाई में बड़ी संख्या में घर महिलाओं के नाम है । एसटीईएम में 43 प्रतिशत महिला भागीदारी।

इस अवसर पर भाजपा महानगर महामंत्री विशाल त्यागी, भाजपा प्रांतीय परिषद सदस्य निमित जायसवाल, मीडिया प्रभारी अर्चित गुप्ता, जिला महामंत्री नवीन चौधरी, जिला उपाध्यक्ष मयूर भाटिया आदि उपस्थित रहे।

कशिश चौहान, मंत्री, जिला मुरादाबाद, भाजपा

इस दौरान भाजपा में जिला मंत्री बनी कशिश चौहान ने भी सरकार के इस कदम की सराहना की है। कशिश चौहान का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी का बहुत आभार जो की महिलाओ के लिए इतना अच्छा क़ानून पास करवा रहे है और ये महिलाओ की सफलता मे बहुत बड़ा योगदान देगी, 33% आरक्षण उन महिलाओ के लिए जो जमीनी स्तर पर काम कर रहीं है उनके लिए बड़ा सफलता का कारण बनेगी, अब महिलाएं देश कों नयी दिशा प्रदान कर सकेंगी। कुछ पार्टियों मे परिवारवाद या फिर पति पत्नियों के नाम म इस्तेमाल करते है इसमें बहुत फायेदामंद रहेगा। हम भले समाज मे बहुत आगे बढ़ चुके लेकिन लोग कही ना कहीं आज भी महिलाओ के चरित्र पर सवाल उठाते है और सोचते है की कहीं ना कहीं चरित्र पीछे कर आगे बड़ी होगी लेकिन ये 33% महिलाओ के चरित्र कों पीछे रखकर नहीं बल्कि उनकी पढ़ाई मेहनत और धरातल पर किए कार्य खुद रास्ता निकलेगा।अब महिलाएं अब टैलेंट के तौर पर आगे बढ़ेंगी। कहते है दिल्ली दूर नहीं तो अब महिलाएं भी कहेंगी अब दिल्ली दूर नहीं होगा।

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