मुरादाबाद:: पीतल नगरी के नाम से देश-दुनिया में पहचान रखने वाला मुरादाबाद का हस्तशिल्प उद्योग इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। बढ़ती उत्पादन लागत, कच्चे माल की महंगाई, गैस आपूर्ति की दिक्कत और निर्यात खर्च में लगातार इजाफे ने उद्योगपतियों की चिंता बढ़ा दी है। हालात इतने चुनौतीपूर्ण हो गए हैं कि कई निर्यात इकाइयों पर बंदी का खतरा मंडराने लगा है। मंगलवार को कलक्ट्रेट में आयोजित उद्योग बंधु की बैठक में निर्यात उद्योग के सामने आ रहीं चुनौतियां मुद्दा रहीं। विभिन्न औद्योगिक संगठनों और निर्यात प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। जिसमें उन्होंने प्रशासन के समक्ष समस्याएं रखते हुए त्वरित समाधान की मांग की। मुरादाबाद का हस्तशिल्प उद्योग पिछले कई वर्षों के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। उद्योग पर एक साथ कई आर्थिक और परिचालन दबाव बढ़ गए हैं, जिससे उत्पादन, निर्यात और रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है। खासतौर पर औद्योगिक धातुओं की कीमतों में असामान्य वृद्धि, पैकेजिंग सामग्री की महंगाई, गैस की सीमित उपलब्धता और बढ़ती ऊर्जा लागत ने इकाइयों की कमर तोड़ दी है। मंगलवार को कलक्ट्रेट में हुई उद्योग बंधु की बैठक में निर्यात उद्योग के सामने आ रहीं चुनौतियां मुद्दा रहीं। विभिन्न औद्योगिक संगठनों और निर्यात प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। जिसमें उन्होंने प्रशासन के समक्ष समस्याएं रखते हुए त्वरित समाधान की मांग की। यस (यंग एंटरप्रेन्योर्स सोसायटी) और एमएचईए के प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग की वर्तमान स्थिति को चिंताजनक बताया।

इसके अलावा फ्रेट और लाजिस्टिक्स खर्च में लगातार बढ़ोतरी, वार-रिस्क इंश्योरेंस और शिपिंग लागत में इजाफा, कार्यशील पूंजी का दबाव और संचालन लागत में वृद्धि ने एमएसएमई निर्यातकों के लिए स्थिति और जटिल बना दी है। प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कई इकाइयों के बंद होने का खतरा पैदा हो सकता है। बैठक में उपायुक्त उद्योग दीपेंद्र कुमार ने जानकारी दी कि टोरेंट गैस द्वारा औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए गैस आपूर्ति को पिछले छह माह की औसत खपत के 80 प्रतिशत तक बहाल कर दिया गया है। साथ ही अतिरिक्त 80 प्रतिशत से अधिक गैस खपतं को स्पाट गैस मूल्य पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। इस निर्णय का उद्योग प्रतिनिधियों ने स्वागत करते हुए कहा। कि इससे गैस आधारित उत्पादन इकाइयों को आंशिक राहत मिलेगी। इस दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को प्रेषित ज्ञापन की प्रति भी सौंपी, जिसमें कच्चे माल की जमाखोरी पर सख्त निगरानी, रा मैटेरियल बैंक की स्थापना, गैस दरों में राहत, पैकेजिंग सामग्री पर जीएसटी रेशनलाइजेशन, फ्रेट सहायता, कार्यशील पूंजी, ब्याज राहत और क्रेडिट सपोर्ट जैसी प्रमुख मांगें उठाई गईं। यहां यस चेयरमैन जेपी सिंह, गगन दुग्गल, अंकित सिंह, उज्जवल अग्रवाल, नरेंद्र चौधरी, तनुज टंडन, पुनीत आर्य आदि रहे।
