नई दिल्ली। ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा के बाद गुरुवार को पहली बार लोकसभा में आसन पर आए और सदन की कार्यवाही को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक सशक्त विपक्ष का होना बेहद जरूरी है और सदन में नेता प्रतिपक्ष को कभी भी बोलने से नहीं रोका गया।
स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि संसद में नियम सर्वोपरि हैं और कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है, चाहे वह देश के प्रधानमंत्री ही क्यों न हों। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में सदन में 12 घंटे से अधिक समय तक बहस हुई, ताकि सभी सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि यह सदन देश के 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और हर सांसद अपने क्षेत्र की समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर यहां आता है। उनकी हमेशा कोशिश रहती है कि हर सांसद को नियमों के तहत बोलने का मौका मिले। उन्होंने कहा कि जो सांसद कम बोलते हैं, उन्हें भी बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, क्योंकि चर्चा से ही लोकतंत्र मजबूत होता है।
ओम बिरला ने विपक्ष के उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें कहा गया था कि नेता प्रतिपक्ष का माइक बंद कर दिया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चेयर के पास माइक बंद करने का कोई बटन नहीं होता। साथ ही उन्होंने कहा कि सदन में सभी सदस्यों को नियमों के तहत अपनी बात रखने का अधिकार है।
स्पीकर ने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में सभी महिला सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर मिला है। हालांकि बजट चर्चा के दौरान कुछ महिला सदस्यों द्वारा नारेबाजी करने की घटना अप्रत्याशित थी। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। यदि व्यवस्था भंग होती है तो कभी-कभी निलंबन जैसे कठोर निर्णय भी लेने पड़ते हैं। उनका प्रयास हमेशा यही रहता है कि सदन में हर आवाज सुनी जाए और लोकतंत्र की गरिमा बनी रहे।
