मुरादाबाद :: भाजपा के मेयर विनोद अग्रवाल की जमीन पर बनी बाउंड्री टूटी तो सियासी भूचाल खड़ा हो गया। मुरादाबाद से लेकर लखनऊ तक सियासी हलचल मची है। महापौर विनोद अग्रवाल बाउंड्री गिराने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही की मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि बाउंड्री गिराई है तो बनवानी भी पड़ेगी, SDM की सैलरी से बाउंड्री को बनवाने की मांग पर भी महापौर अड़े हुए हैं।
मुरादाबाद के धीमरी में CM कम्पोजिट विद्यालय बनाये जाने की योजना जिला प्रशासन के द्वारा बनाई गई है लेकिन महापौर का दावा है कि भाजपाइयों की निजी जमीन पर बुल्डोजर कार्यवाही की गई है। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन बैकफुट पर आ गया और जमीन की दोबारा पैमाइश कराने का फैसला किया लिया गया।

बवाल बढ़ने के बाद शुक्रवार सुबह जिलाधिकारी अनुज सिंह खुद मौके पर पहुंचे। उनके साथ मुरादाबाद सदर और बिलारी तहसील की टीम भी मौजूद रही। डीएम ने जमीन की दोबारा पैमाइश कराने के आदेश दिए। इस दौरान मेयर विनोद अग्रवाल भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने अपनी निजी टीम से भी समानांतर पैमाइश कराई। मेयर का दावा है कि जिस जमीन को प्रशासन सरकारी बता रहा है, वह उनकी निजी संपत्ति है, जिसे उन्होंने करीब 10 साल पहले चांद बाबू से खरीदी थी।
क्या है पूरा विवाद
जिला प्रशासन ने नेशनल हाईवे बाईपास के किनारे धीमरी गांव के रकबे में “CM मॉडल कंपोजिट स्कूल” के निर्माण के लिए करीब छह एकड़ भूमि आरक्षित की है। इस स्कूल के निर्माण का जिम्मा यूपीपीसीएल को दिया गया है। जब यूपीपीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर मौके पर पहुंचे तो वहां बाउंड्रीवॉल बनी थी यानी भाजपाइयों की जमीन थी, जिसे सरकारी बताया गया है। इसके बाद प्रशासन ने गुरुवार को बुलडोजर चलाकर बाउंड्री को तुड़वा दिया, बताया जा रहा है कि यह बाउंड्री मेयर विनोद अग्रवाल और भाजपा नेता अमित चौधरी की थी। दोनों ने इस कार्रवाई का विरोध किया, जिसके बाद प्रशासन ने जमीन की दोबारा पैमाइश कराने का निर्णय लिया।

मेयर बोले – जिस SDM ने गिराई बाउंड्री उस पर कराकर रहूँगा कार्यवाही
भाजपा मेयर विनोद अग्रवाल का कहना है कि प्रशासन पूरे मामले में लीपापोती कर रहा है। इस संबंध में उन्होंने लखनऊ में शासन के उच्चाधिकारियों से भी बात की है। बाउंड्री गिराने वाले एसडीएम सदर डॉ. राममोहन मीणा के खिलाफ कार्रवाई से कम कुछ भी स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिस जमीन पर प्रशासन स्कूल बनाने की बात कर रहा है, उसका लैंड यूज इंडस्ट्रियल है और वहां स्कूल नहीं बन सकता। मेयर का आरोप है कि इसी कारण प्रशासन अब प्रोजेक्ट को दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात कहकर मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है।
राजनैतिक गलियारों में चर्चाओं का बाज़ार गर्म, चुनावी साल में ऐसी कार्यवाही 2027 के लिये दुःखद
राजनैतिक गलियारों में ये चर्चा है कि आख़िर चुनावी साल में की जारी ऐसी कार्यवाही कहीं घाटे का सौदा साबित ना हो जायें क्योंकि चर्चा है कि 2027 में इसका सीधा असर जरूर पड़ेगा। जिस तरह प्रशासन की कार्यवाही जनपद में चल रही हैं वो चुनाव पर सीधा असर ना डाल दें। चर्चाओं को सुनकर लगता है कि अब सरकार और संगठन को इस चुनावी साल में सोच समझकर कदम आगे बढ़ाने होंगे। यदि ऐसा ही चलता रहा तो आगामी विधानसभा चुनावों में इसका असर पड़ना भी तय है। अब देखना होगा कि शासन इस कार्यवाही को किस रूप में लेता है।
