इंडस्ट्रियल ज़ोन में स्कूल का प्रस्ताव, नियमों पर उठी उंगलियां

मुरादाबाद :: प्रशासन की बुल्डोजर कार्यवाही पर भाजपाइयों ने बड़े सवाल खड़े किये हैं। उनका कहना है कि आख़िर कैसे इंडस्ट्रियल क्षेत्र में बच्चों के कम्पोजिट स्कूल को प्रस्तावित करा दिया गया। आख़िर कैसे आँखे मूंद कर मुख्यमंत्री के प्रोजेक्ट को इंडस्ट्रियल क्षेत्र में बनाने की योजना तैयार कर ली गई जबकि इस क्षेत्र में स्कूल बनाना बच्चों के नौनिहालों से खिलवाड़ साबित हो सकता है। इस मामले में लखनऊ स्तर पर हुई शिकायत के बाद दोषियों पर कार्यवाही होना भी तय माना जा रहा है लेकिन अधिकारियों की पहुंच के आगे कहीं ये कार्यवाही भी ठंडे बस्ते में ना पड़ जाये भाजपाई ये भी मान रहे हैं। अब सवाल ये है कि आख़िर कैसे एक इंडस्ट्रियल क्षेत्र में कंपोजिट विद्यालय बनाने की तैयारी प्रशासन के द्वारा कर ली गई। सूत्रों के मुताबिक इस मामले की शिकायत भी लखनऊ में बड़े अधिकारियों और बड़े नेताओं से की गई है। बुल्डोजर कार्यवाही में की गई लापरवाही पर कार्यवाही की तलवार भी अधिकारियों पर लटकी नजर आ रही है।

क्या है पूरा विवाद

जिला प्रशासन ने नेशनल हाईवे बाईपास के किनारे धीमरी गांव के रकबे में “CM मॉडल कंपोजिट स्कूल” के निर्माण के लिए करीब छह एकड़ भूमि आरक्षित की है। इस स्कूल के निर्माण का जिम्मा यूपीपीसीएल को दिया गया है। जब यूपीपीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर मौके पर पहुंचे तो वहां बाउंड्रीवॉल बनी थी यानी भाजपाइयों की जमीन थी, जिसे सरकारी बताया गया है। इसके बाद प्रशासन ने गुरुवार को बुलडोजर चलाकर बाउंड्री को तुड़वा दिया, बताया जा रहा है कि यह बाउंड्री मेयर विनोद अग्रवाल और भाजपा नेता अमित चौधरी की थी। दोनों ने इस कार्रवाई का विरोध किया, जिसके बाद प्रशासन ने जमीन की दोबारा पैमाइश कराने का निर्णय लिया।

राजनैतिक गलियारों में चर्चाओं का बाज़ार गर्म, चुनावी साल में ऐसी कार्यवाही 2027 के लिये दुःखद

राजनैतिक गलियारों में ये चर्चा है कि आख़िर चुनावी साल में की जारी ऐसी कार्यवाही कहीं घाटे का सौदा साबित ना हो जायें क्योंकि चर्चा है कि 2027 में इसका सीधा असर जरूर पड़ेगा। जिस तरह प्रशासन की कार्यवाही जनपद में चल रही हैं वो चुनाव पर सीधा असर ना डाल दें। चर्चाओं को सुनकर लगता है कि अब सरकार और संगठन को इस चुनावी साल में सोच समझकर कदम आगे बढ़ाने होंगे। यदि ऐसा ही चलता रहा तो आगामी विधानसभा चुनावों में इसका असर पड़ना भी तय है। अब देखना होगा कि शासन इस कार्यवाही को किस रूप में लेता है।

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