आबादी नहीं, फिर भी सड़क निर्माण ! मुरादाबाद में ‘जंगल रोड’ पर घमासान !!

मुरादाबाद :: भाजपा नेताओं से जुड़ा भूमि विवाद लगातार गहराता जा रहा है और अब यह मामला प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करने लगा है। ताजा विवाद नगर निगम द्वारा कराए गए एक सड़क निर्माण को लेकर सामने आया है, जिसमें आरोप है कि निगम का धन ऐसी जगह खर्च किया गया जहां फिलहाल कोई आबादी ही नहीं है। बताया जा रहा है कि शहर से दूर एक जंगल क्षेत्र में यह सड़क बनाई गई, जो कथित तौर पर मेयर और भाजपा नेता अमित चौधरी की जमीन तक पहुंचने के लिए तैयार की गई है


स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि जिस स्थान पर सड़क बनाई गई है, वहां न तो कोई बस्ती है और न ही तत्काल किसी सार्वजनिक आवश्यकता का दबाव था। इसके बावजूद नगर निगम ने अपने फंड से वहां अप्रोच रोड का निर्माण करा दिया। इसको लेकर यह सवाल उठ रहा है कि जब शहर के कई घनी आबादी वाले इलाके आज भी सड़क, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब ऐसी जगह पर धन खर्च करना कितना उचित है।


दस्तावेजों के अनुसार, इस सड़क निर्माण परियोजना को 15वें वित्त आयोग की बैठक में मंजूरी दी गई थी। हालांकि, अब इस मंजूरी की प्रक्रिया और उसके पीछे की मंशा पर भी सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं सरकारी धन का दुरुपयोग तो नहीं हुआ।


इसी बीच, हाल ही में विवादित भूमि पर प्रशासन द्वारा बाउंड्री तोड़ने के लिए बुलडोजर चलाए जाने के बाद मामला और ज्यादा तूल पकड़ गया है। इस कार्रवाई के बाद विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। जिला प्रशासन का दावा है कि संबंधित जमीन सरकारी है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि जमीन उनकी निजी संपत्ति है।
मेयर विनोद अग्रवाल ने अपनी सफाई में कहा है कि उन्होंने यह जमीन करीब 10 साल पहले आजाद समाज पार्टी के नेता हाजी चांद बाबू से खरीदी थी। वहीं प्रशासन और भाजपा नेताओं के बीच इस मुद्दे पर टकराव की स्थिति बनी हुई है। विवाद को बढ़ता देख मंडलायुक्त आन्जनेय सिंह ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बाहरी टीम से दोबारा पैमाइश कराने के निर्देश दिए हैं।


अब इस पूरे मामले पर आम जनता, प्रशासन और राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हैं। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि सड़क निर्माण और भूमि स्वामित्व को लेकर उठ रहे सवालों में कितनी सच्चाई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *