मुरादाबाद: हनुमान चालीसा पाठ को लेकर विवाद गहराया, 60 अज्ञात समेत कई पर मुकदमा

मुरादाबाद :: नगर निगम कार्यालय परिसर में हनुमान चालीसा के पाठ और गौ सुरक्षा के मुद्दे से जुड़ा विवाद अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। नगर निगम प्रशासन की शिकायत के बाद राष्ट्रीय बजरंग दल से जुड़े कई कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने से यह मामला कानून और धार्मिक आस्था के बीच टकराव का रूप लेता नजर आ रहा है। घटना के बाद शहर का माहौल संवेदनशील बना हुआ है और राजनीतिक-सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम के मुख्य सुरक्षा अधिकारी अवनीश कुमार गौतम ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों का सरकारी परिसर में प्रवेश सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। साथ ही, कुछ लोगों द्वारा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की बात भी शिकायत में कही गई है। पुलिस ने इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए बजरंग दल के स्थानीय नेता अमित अग्रवाल समेत करीब 60 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इनमें सरकारी कार्य में बाधा, शांति व्यवस्था भंग करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुकदमा दर्ज होने के बाद राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है। संगठन ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए विरोध तेज कर दिया है। इसी क्रम में संगठन के नेता रोहन सक्सेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया। उनका कहना है कि हनुमान चालीसा का पाठ आस्था से जुड़ा विषय है और इसे अपराध की श्रेणी में रखना गलत है। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण था और किसी प्रकार की अव्यवस्था फैलाने का उद्देश्य नहीं था। रोहन सक्सेना ने यह भी कहा कि उन्हें प्रवीण तोगड़िया का समर्थन प्राप्त है और यदि मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो संगठन व्यापक आंदोलन करेगा। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि निष्पक्षता के लिए शिकायत करने वाले नगर निगम कर्मचारी के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

 

 

 

 

 

अब यह विवाद केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक और धार्मिक बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मामले का समाधान किस दिशा में जाता है और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई संतुलित रास्ता निकल पाता है।

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