निर्यातकों की संस्था YES (यंग एंटरप्रेन्योर सोसाइटी) ने अपने पूर्व नेशनल चेयरमैन विशाल अग्रवाल को संगठन से बाहर कर दिया है। साथ ही उन्हें YES से जुड़े सभी ग्रुप्स से भी हटा दिया गया है। संस्था के कॉर्डिनेटर ने इस कार्रवाई के पीछे “संस्था विरोधी गतिविधियों” में संलिप्तता का आरोप लगाया है।

हालांकि, इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए विशाल अग्रवाल ने इसे निर्यातकों की आवाज उठाने की सजा बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (EPCH) से फेयर फीस कम करने की मांग की थी, जिसे गलत तरीके से बगावत के रूप में लिया गया।

विशाल अग्रवाल के मुताबिक, एक्सपोर्ट इंडस्ट्री इस समय मंदी के दौर से गुजर रही है और सरकार की ओर से मिलने वाले कई अनुदान भी बंद हो चुके हैं। ऐसे में उन्होंने EPCH से फेयर और मेंबरशिप फीस को कम करने का आग्रह किया था, ताकि निर्यातकों को राहत मिल सके। लेकिन, उनके अनुसार, संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने इस मुद्दे पर सकारात्मक कदम उठाने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई करना उचित समझा।

शहर के अन्य संगठनों LUB ने भी उठाई थी आवाज
इंडस्ट्री की हालत को देखते हुए विभिन्न संगठन अपनी इकाइयों को मजबूत करने और समस्या से निकलने की ओर काम कर रहे हैं। ऐसे में LUB ने अधिकारियों के साथ बैठक करके निर्यातकों को राहत देने जैसी मांगे की थी तो वहीं EPCH फेरस मुद्दे को लेकर LUB लघु उद्योग भारती ने भी मौजूदा हालात को देखते हुए EPCH से फेयर फीस कम करने की मांग उठाई है। संस्था का कहना है कि बढ़ती लागत और घटते ऑर्डर्स के बीच निर्यातकों को राहत देने के लिए फीस में कमी जरूरी है।
विशाल अग्रवाल बोले :: –
पब्लिक टीवी से बात करते हुए पूर्व चेयरमैन विशाल अग्रवाल ने कहा कि निर्यातक इस वक्त मंदी से जूझ रहे हैं, इसीलिए EPCH से फ़ीस कम करने की मांग की गई थी। इसी मांग को संगठन विरोधी कार्य बताया जा रहा है जो सरासर गलत है। संगठन निर्यात जगत की आवाज़ उठाने के लिये बनाये जाते हैं ना कि आवाज़ को दबाने के लिये। उन्होंने कहा कि जितने भी लोगों ने मेरी इस बात पर सहमति जताई उन पर भी एक्शन लिया गया है। विशाल अग्रवाल ने कहा कि अब ये संगठन वो नहीं रहा जहां पर निर्यात की बात होती थी अब यहां एक दूसरे को गिराने के लिए काम होता है।
