मुरादाबाद में यंग एंटरप्रेन्योर सोसाइटी (YES) के पूर्व नेशनल चेयरमैन विशाल अग्रवाल को संस्था से बाहर किए जाने के बाद मुरादाबाद की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री में विभाजन की स्थिति बनती नजर आ रही है। इस फैसले के विरोध में 100 से अधिक निर्यातक लामबंद हो गए हैं। नई संस्था गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मुरादाबाद, जो अपने हस्तशिल्प उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है, यहां से पूरे विश्व में निर्यात किया जाता है। शहर में दो हज़ार से ज्यादा यूनिट्स संचालित हैं, जहां पीतल, कांच, लकड़ी और आयरन से बने उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

बड़ी इंडस्ट्री होने के चलते यहां निर्यातकों के कई संगठन सक्रिय हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट इस क्षेत्र को बढ़ावा देने का काम करती है, जो साल में दो बार ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में हस्तशिल्प मेले का आयोजन भी करती है।
वर्तमान में मुरादाबाद के निर्यातक नीरज खन्ना EPCH के चेयरमैन हैं। हालांकि, बीते कुछ समय से EPCH और अन्य संगठनों के बीच मतभेद और टकराव की खबरें सामने आती रही हैं। हाल ही में फंड और ट्रैवलिंग खर्चों को लेकर भी विवाद उभरा था। इस बीच नीरज खन्ना के इस्तीफे की खबर और कथित पत्र सामने आया, लेकिन बाद में उन्होंने खुद इसे खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वह अब भी चेयरमैन पद पर बने हुए हैं।
अब YES से विशाल अग्रवाल को हटाए जाने के बाद निर्यातकों के बीच असंतोष और गहराता दिख रहा है। विरोध कर रहे निर्यातकों का कहना है कि अग्रवाल को केवल इसलिए बाहर किया गया क्योंकि उन्होंने निर्यातकों की आवाज उठाई। ऐसे में संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों से जूझ रही मुरादाबाद की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री को एकजुट होकर आगे बढ़ने की जरूरत है, लेकिन मौजूदा हालात ‘निर्यात नहीं, रण’ जैसी स्थिति पैदा करते नजर आ रहे हैं।

वही इस पर निर्यातक नदीम खान का कहना है कि अब तानाशाही वाला रवैया अपनाया जा रहा है। निर्यातकों की मांग EPCH और चेयरमैन से मेल के माध्यम से की गई थी। निर्यातकों की मांग भी MHEA के ग्रुप में सेंड की गई जिसे ग्रुप से डिलीट कर दिया गया। निर्यातकों से जुड़ी परेशानियों को जिम्मेदारों के सामने रखना कोई गुनाह नहीं है। इस तरह की कार्यवाही बेहद शर्मनाक है।
