अंकित चौहान::
फेयर में स्टॉल की कीमत कम करने की मांग को लेकर खड़ा हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। EPCH से निर्यातकों की समस्याओं को लेकर मांग रखने पर ‘YES’ के पूर्व चेयरमैन को बाहर कर दिया गया। वहीं अब निर्यातकों के द्वारा स्टॉल के रेट कम करने की मांग का जवाब EPCH की ओर से जारी किए गए प्रेस नोट में निर्यातकों को 18 मीटर का स्टॉल लेने की नसीहत दी जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश सरकार की सब्सिडी मिल सके। ऐसे में अब अन्य संगठन भी नाराज होते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि ये योजना सिर्फ़ उत्तर प्रदेश की है। जबकि स्टॉल रेट कम करने की मांग पूरे देश के निर्यातकों की है। ऐसे में जोधपुर, जयपुर के निर्यातक क्या करेंगे।

क्या EPCH में अब सिर्फ़ UP के निर्यातकों की बात होगी :: अजय गुप्ता
लघु उद्योग भारती के प्रदेश उपाध्यक्ष अजय गुप्ता ( जिम्मी ) का कहना है कि स्टॉल के किराए में कटौती की मांग पूरे देश के निर्यातकों की है। EPCH के द्वारा सब्सिडी पर स्टॉल लेने की बात कही जा रही है जो सरासर गलत है। अजय गुप्ता का कहना है कि सब्सिडी की योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के निर्यातक ही उठा सकते हैं। देश के अन्य राज्यों में भी निर्यातक है वो क्या करेंगे ? उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। EPCH पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है। ऐसे में अब क्या सिर्फ उत्तर प्रदेश के निर्यात की बात होगी। अजय गुप्ता का कहना है कि स्टॉल के रेट में कमी आएगी तो इसका लाभ देश के निर्यातकों को मिलेगा। देश का निर्यातक तरक्की करेगा तो देश भी तरक्की करेगा।

18 मीटर का स्टॉल लेकर सब्सिडी का उठाये लाभ :: EPCH
EPCH के क्षेत्रीय संयोजक अवधेश अग्रवाल ने कहा कि छोटे निर्यातकों एवम ऐसे निर्यातक जिनके पास इस समय काम की कमी है उनकी मांग को ध्यान में रखते हुए बताया कि 18 वर्ग मीटर के स्टॉल के लिए कुल लागत 9,500 प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से 1,71,000 होती है। इसमें से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 75% की सब्सिडी 1,28,250 प्रदान की जाती है, जिससे निर्यातक को केवल 42,750 का ही भुगतान करना पड़ता है। जिन निर्यातकों के पास काम की कमी है या जो छोटे निर्यातक है उन सभी को इस योजना का लाभ मिलेगा,इसके लिए सभी बड़े निर्यातकों के स्टाल का साइज 18 मीटर करके योजना का लाभ दिया जाएगा और शेष बचे स्थान को अन्य छोटे निर्यातको को अलॉट किया जाएगा ताकि सभी को व्यापार के समुचित अवसर मिले सके।

तानाशाही करके निर्यातकों को गर्त में ले जा रहे कुछ लोग
निर्यातक नदीम खान का कहना है कि अब तानाशाही वाला रवैया अपनाया जा रहा है। निर्यातकों की मांग EPCH और चेयरमैन से मेल के माध्यम से की गई थी। निर्यातकों की मांग भी MHEA के ग्रुप में सेंड की गई जिसे ग्रुप से डिलीट कर दिया गया। निर्यातकों से जुड़ी परेशानियों को जिम्मेदारों के सामने रखना कोई गुनाह नहीं है। इस तरह की कार्यवाही बेहद शर्मनाक है।
