दिल्ली :: पश्चिम एशिया में तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों, विशेषकर तेल टैंकरों पर युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम में तेज वृद्धि देखी गई थी। इस बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव वैश्विक शिपिंग लागत, ईंधन (बंकर) खर्च और फ्रेट दरों पर पड़ा, जिससे भारत के निर्यातकों, विशेषकर हस्तशिल्प क्षेत्र पर अतिरिक्त लागत का दबाव बना है। हालांकि, हाल के अंतरराष्ट्रीय संकेतों के अनुसार संघर्ष विराम और संभावित शांति वार्ताओं के बीच स्थिति में आंशिक सुधार के संकेत मिल रहे हैं। प्रमुख समुद्री बीमा संस्थाएं अब जोखिम का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं, जिससे युद्ध जोखिम से जुड़े अतिरिक्त शुल्कों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना बन रही है।
यश के चेयरमैन जेपी सिंह ने पब्लिक टीवी से बात करते हुए बताया कि का कहना है कि युद्ध विराम के बाद से हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए एक अच्छी ख़बर है। युद्ध विराम के बाद तेल टैंकर बीमा प्रीमियम में कमी से ईंधन लागत पर दबाव घटेगा, जिसका सकारात्मक प्रभाव कंटेनर फ्रेट दरों पर पड़ेगा। इससे निर्यातकों की कीमत प्रतिस्पर्धा बेहतर हो सकती है। तो वहीं उन्होंने कहा कि युद्ध जोखिम, मार्ग परिवर्तन और देरी से जुड़े अतिरिक्त शुल्कों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है, जिससे कुल निर्यात लागत भी कम हो सकती है। तो वहीं उनका कहना है कि हॉर्मुज मार्ग सामान्य होने पर जहाजों को लंबा मार्ग नहीं अपनाना पड़ेगा, जिससे माल की डिलीवरी समय पर और अधिक विश्वसनीय होगी। लॉजिस्टिक्स में स्थिरता आने से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा और वे नए ऑर्डर जारी करने में अधिक सहज होंगे।
ये है निर्यातकों को उम्मीद
– आने वाले 4–8 सप्ताह में फ्रेट दरों में नरमी संभव है।
– रुके हुए शिपमेंट और ऑर्डर्स के पुनः शुरू होने की संभावना है।
– निर्यातकों को मूल्य निर्धारण में लचीलापन मिल सकता है।
– यह समय खरीदारों के साथ सक्रिय संवाद और ऑर्डर प्राप्त करने का है।
निर्यातकों की संस्था “YES” के चेयरमैन जेपी सिंह ने बात करते हुए कहा कि ईरान और इज़राइल के बीच युद्ध विराम होने की ख़बर आने के बाद से निर्यातकों में खुशी है। उनका कहना है कि ऑयल टैंकर बीमा प्रीमियम में संभावित कमी वैश्विक शिपिंग लागत को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है, जिससे हस्तशिल्प निर्यातकों को राहत मिलेगी। हालांकि सुधार धीरे-धीरे होगा, लेकिन यह निर्यातकों के लिए लागत दबाव कम करने और नए अवसरों का लाभ उठाने का महत्वपूर्ण समय है।
जेपी सिंह बोले :-
“वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां हमें एक स्पष्ट संकेत दे रही हैं—जो निर्यातक तेजी से निर्णय लेकर बाजार के साथ खुद को पुनर्संतुलित करेंगे, वही आगे बढ़ेंगे। खाड़ी क्षेत्र में स्थिति में सुधार के संकेत हमारे लिए एक अवसर हैं, लेकिन हमें इसे तुरंत कैप्चर करना होगा। हस्तशिल्प उद्योग, विशेषकर मुरादाबाद क्लस्टर, को अब ‘wait and watch’ की बजाय ‘act and capture’ की रणनीति अपनानी होगी। लागत नियंत्रण, समय पर डिलीवरी और खरीदारों के साथ निरंतर संवाद—यही अगले कुछ महीनों की सफलता की कुंजी होगी। मैं सभी निर्यातकों से आग्रह करता हूं कि वे इस बदलते वैश्विक परिदृश्य को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखें और पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ें।
